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Saturday, June 6, 2026

झारखंड प्रदेश के सरायकेला खरसांवा जिला के दलमा से ईचागढ़ तक हाथियों का पलायन बना चिंता का विषय, जंगल कटने और संसाधनों की कमी पर उठे सवाल /संपादक विशेष कुमार तांती

संपादक विशेष कुमार तांती/सरायकेला खरसावां : चांडिल वन क्षेत्र के ईचागढ़ विधानसभा अंतर्गत तूतां और दुलमीडीह जंगल में शनिवार को हाथियों का झुंड जलाशय के आसपास विचरण करता देखा गया. पिछले कई वर्षों से दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी के हाथी ईचागढ़, चांडिल, नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों में स्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं. इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है.स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 193 वर्ग किलोमीटर में फैली दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी हाथियों का प्राकृतिक आवास है, लेकिन भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण हाथी अपने पारंपरिक क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं. ग्रामीणों का सवाल है कि वन्यजीव संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हाथियों को उनके आवास में आवश्यक संसाधन क्यों नहीं मिल पा रहे हैं.
पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण, दूसरी ओर पेड़ों की कटाई
विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यटन विकास के नाम पर जंगलों में कॉटेज और अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि जंगलों के लगातार सिकुड़ने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है.ईको सेंसिटिव जोन में विकास बनाम संरक्षण की बहस
दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है. इसके बावजूद क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि वन्यजीवों के आवास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.बंगाल के अयोध्या पहाड़ क्षेत्र का भी असर जानकारों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित अयोध्या पहाड़ क्षेत्र में बढ़ते निर्माण कार्यों और पर्यटन गतिविधियों के कारण भी हाथियों के पारंपरिक मार्ग और आवास प्रभावित हुए हैं. इसका असर झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं.बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्षहाथियों के गांवों और कृषि क्षेत्रों में पहुंचने से फसल क्षति, संपत्ति नुकसान और जनहानि की घटनाएं बढ़ी हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जंगलों में पर्याप्त जल स्रोत, चारा और सुरक्षित आवास विकसित किए जाएं तो हाथियों का पलायन कम हो सकता है.
स्थायी समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथियों के पारंपरिक आवासों का संरक्षण, जल स्रोतों का विकास, वन क्षेत्र का विस्तार और हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित रखना जरूरी है. पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना समय की आवश्यकता बन गई है.

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