(पत्रकार दया शंकर सिंह): झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. लंबे इंतजार के बाद अब चुनाव की आहट साफ सुनाई देने लगी है. सत्ताधारी दल हो या विपक्ष, सभी अपनी-अपनी रणनीति में जुट गए हैं. इसी बीच झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने कुछ अहम गाइडलाइन जारी की हैं, जो इस बार कई उम्मीदवारों की राह मुश्किल कर सकती हैं.जानकारी के मुताबिक, नगर निगम बोर्ड की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने वाले सदस्य अब दोबारा निगम का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. यही नहीं, 9 अक्टूबर 2013 के बाद यदि किसी उम्मीदवार का तीसरा बच्चा हुआ है, तो वह भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा. हालांकि, अगर तीसरा बच्चा जीवित नहीं है, तो ऐसे उम्मीदवार पर यह नियम लागू नहीं होगा.
सरकारी बकाया वालों पर भी सख्ती
चुनाव लड़ने के लिए उम्र से जुड़ी शर्तें भी तय की गई हैं. वार्ड पार्षद बनने के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए, जबकि मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की उम्र नामांकन के समय कम से कम 30 वर्ष होनी जरूरी है. कोई भी वार्ड पार्षद प्रत्याशी एक से ज्यादा वार्ड से नामांकन नहीं कर सकेगा.
तीन बच्चों का नियम बना चर्चा का विषय
देखें तो नगर निकाय चुनाव के उम्मीदवार तीन बच्चों के नियम से कई दावेदार प्रभावित हो सकते हैं. धनबाद नगर निगम की मेयर सीट इस बार सामान्य वर्ग के लिए घोषित की गई है, जिसके चलते उम्मीदवारों की लंबी कतार देखने को मिल रही है. शहर में अभी से होर्डिंग और पोस्टर लगने लगे हैं.










