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Wednesday, January 7, 2026

Jharkhand Mayor Seat Reservation : झारखंड नगर निगम चुनाव – मेयर आरक्षण पर सस्पेंस बरकरार(संपादक विशेष कुमार उप बाबू तांती)

Ranchi( रिपोर्टर दया शंकर सिंह ): झारखंड के नगर निकायों में चुनावी बिगुल बजने से पहले मेयर पदों के आरक्षण का मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। राज्य सरकार द्वारा नगर निगमों को दो श्रेणियों (ग्रुप-A और ग्रुप-B) में बांटने के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई एक बार फिर टल गई है।

बुधवार, 7 जनवरी को चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान के सेवानिवृत्त होने के कारण यह सुनवाई स्थगित की गई। अब अदालत इस मामले पर 13 जनवरी मंगलवार को सुनवाई करेगी।

नगर निकाय चुनाव: मेयर पद के लिए आरक्षणक्या है विवाद?

पूरा विवाद नगर विकास विभाग की उस अधिसूचना से शुरू हुआ, जिसमें रांची और धनबाद जैसे बड़े निगमों को एक ही समूह (वर्ग ‘क’) में रखा गया है। याचिकाकर्ता शांतनु चंद्रा (बबलू पासवान) ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आरोप है कि सरकार ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों को दरकिनार कर आरक्षण का ऐसा ‘समीकरण’ तैयार किया है, जिससे रांची की सीट एसटी (ST) के लिए आरक्षित हो जाए और धनबाद की सीट अनारक्षित रहे।

जनसंख्या के आंकड़ों पर सवाल :

याचिका में दावा किया गया है कि नियमों के अनुसार, सबसे अधिक आबादी वाले आदित्यपुर को जनरल और सर्वाधिक एससी (SC) आबादी वाले धनबाद को एससी के लिए आरक्षित होना चाहिए था। इसके अलावा गिरिडीह में कम आबादी के बावजूद पद आरक्षित करने पर भी सवाल उठाए गए हैं। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई में सरकार और निर्वाचन आयोग को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया था। अब 13 जनवरी को तय होगा कि सरकार का यह फॉर्मूला संवैधानिक है या नहीं।