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Tuesday, June 9, 2026

धरती आबा', भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा का 126 वां शहादत दिवस रिजवान खान प्रदेश सचिव (अल्पसंख्यक विभाग)सह जिला महासचिव के नेतृत्व में मनाया गया /पत्रकार अनिल कुमार

                     पत्रकार अनिल कुमारझारखंड प्रदेश के सरायकेला खरसांवा जिला के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के ईमली चौक आदिवासी कल्याण समिति परिसर में स्थापित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर "धरती आबा',महान स्वतंत्रता सेनानी,समाज सुधारक और लोकनायक वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा का 126 वां शहादत दिवस रिजवान खान प्रदेश सचिव (अल्पसंख्यक विभाग)सह जिला महासचिव के नेतृत्व में मनाया गया ।
श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए श्री खान ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी, जनजातीय गौरव के प्रतीक,जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा जी के बलिदान,उनका संघर्ष,त्याग और राष्ट्रभक्ति का संदेश आज भी हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। 
राणा सिंह (इंटक प्रदेश सचिव) सह कोल्हान प्रभारी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र एवं समाज के उत्थान हेतु उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। 
 जिला प्रवक्ता सह प्रदेश उपाध्यक्ष झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी (सूचनाधिकार विभाग) ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उलगुलान के महानायक,आदिवासी अस्मिता,जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा ने अपने संघर्ष और बलिदान से अन्याय के खिलाफ हमें लड़ने की प्रेरणा देते है। 
जिला महासचिव सह अखिल भारतीय ब्रह्मश्री युवा मंच के कार्यकारी जिलाध्यक्ष कमल नयन उर्फ अजीत कुमार ने कहा कि उनका संघर्ष और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
जिला महासचिव सह अखिल भारतीय ब्रह्मश्री युवा मंच के उपाध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्र एवं समाज के उत्थान हेतु उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। 
इस अवसर पर मुख्य रूप से सुनील सिंह जिला उपाध्यक्ष,अवधेश सिंह जिला उपाध्यक्ष सह वार्ड पार्षद,रूईदास चाकी,अरमान अली,मंजर अली, एम. डी. कलाम उद्दीन,मनोज महतो,शत्रुघ्न कालिंदी,वासु गहराई,पवन महतो,नरेश महतो,हंस  दा,शिबु  सरदार ,  सहित बडी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

सरायकेला खरसांवा : ट्रैक्टर की चपेट में आने से कॉपरेटिव कॉलेज के छात्र की मौत, न्याय के लिए परिजनों का थाने पहुंचे आदित्यपुर थाना/पत्रकार अनिल कुमार

 पत्रकार अनिल कुमार  :आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रेलवे अंडर ब्रिज के पास सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में कॉपरेटिव कॉलेज के 11वीं कक्षा के छात्र की मौत हो गई। मृतक की पहचान आरआईटी थाना क्षेत्र के रायडीह बस्ती निवासी कन्हाई दास के रूप में हुई है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय निवासियों ने मंगलवार सुबह आदित्यपुर थाने पहुंचकर उचित कार्रवाई और मुआवजे की मांग को लेकर जमकर गुहार लगाई

अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कियादुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से लहूलुहान छात्र को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मौके पर पहुंची आदित्यपुर थाना पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर को तत्काल जब्त कर थाने ले आई।

​थाने पहुंचे परिजन, उचित कार्रवाई की मांगघटना से आक्रोशित और मर्माहत परिजन बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों के साथ मंगलवार सुबह आदित्यपुर थाना पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से दोषी ट्रैक्टर चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

Monday, June 8, 2026

Land Scam: 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अदालत से नहीं मिली राहत/पत्रकार दया शंकर सिंह

पत्रकार दया शंकर सिंह /रांची के बड़गाई क्षेत्र में 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़ा और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अदालत से राहत नहीं मिली है। धन शोधन निवारणअधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज कर दिया है, जिससे यह मामला अब आगे की कानूनी कार्यवाही की दिशा में बढ़ गया है। विशेष पीएमएलए अदालत के जज योगेश कुमार ने सोमवार को यह आदेश सुनाया। इससे पहले तीन जून को दोनों पक्षों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी थीं। सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।दरअसल, मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका में कहा गया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप आधारहीन हैं और वे इस मामले में निर्दोष हैं। याचिका में यह भी दावा किया गया था कि ईडी के पास ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं, जो उन्हें अपराध से सीधे जोड़ सकें। बचाव पक्ष ने इसे “राजनीतिक और कानूनी रूप से कमजोर मामला” बताते हुए आरोपमुक्त करने की मांग की थी।
हालांकि विशेष अदालत ने बचाव पछ दलील स्वीकार नहीं किया और यह माना कि इस स्तर पर आरोप को समाप्त करने का कोई आधार नहीं है अदालत के अनुसार मामले के आगे विचार धारा के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है इस लिए याचिका खारिज कर दिया गया इस मामले के जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने कई बार छापेमारी की और संबंधित लोगो से पूछताछ भी की जांच के बाद एजेंसी ने कई आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है परिवर्तन निदेशालय का दावा है कि जमीन के दस्तावज में हेरा फेर और आवेद लेने देन के जरिए धन शोधन किया गया 
हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर 2025 को यह याचिका दायर कर खुद को इस मामले से मुक्त करने की मांग की थी। लेकिन अब अदालत के ताजा फैसले के बाद मामला ट्रायल की ओर आगे बढ़ेगा। कानून के जानकारों के अनुसार, डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद अब इस मामले में अदालत में नियमित सुनवाई जारी रहेगी।

Saturday, June 6, 2026

झारखंड प्रदेश के इन जिलों में 1 से 3 घंटे में बारिश, आंधी और वज्रपात का अलर्ट/संपादक विशेष कुमार तांती

Jharkhand : रांची। अगले 1 से 3 घंटे में झारखंड के कई जिलों में गर्जन के साथ वज्रपात (आसमानी बिजली) की आशंका है। कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। तेज हवा भी चलेगी। रांची के मौसम विभाग के केंद्र ने यह जानकारी दी है। इसे लेकर तात्‍कालिक अलर्ट जारी किया गया है। इसके मद्देनजर सावधान रहने की जरूरत है।
अलर्ट को देखते हुए सतर्क और सावधान रहें। सु‍रक्षित स्‍थान में शरण लें। पेड़ के नीचे खड़ा नहीं रहें। बिजली के पोल से दूर रहें। किसान अपने खेत में नहीं जाएं। मौसम सामान्‍य होने का इंतजार करें। बिजली के उपकरणों का उपयोग नहीं करें।इन जिलों में असर
मौसम केंद्र के मुताबिक गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, कोडरमा, सिमडेगा, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, जामताड़ा जिलों में कहीं-कहीं इसका असर देखने को मिलेगा। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा भी चलने के संकेत मिले हैं।

झारखंड प्रदेश के सरायकेला खरसांवा जिला के दलमा से ईचागढ़ तक हाथियों का पलायन बना चिंता का विषय, जंगल कटने और संसाधनों की कमी पर उठे सवाल /संपादक विशेष कुमार तांती

संपादक विशेष कुमार तांती/सरायकेला खरसावां : चांडिल वन क्षेत्र के ईचागढ़ विधानसभा अंतर्गत तूतां और दुलमीडीह जंगल में शनिवार को हाथियों का झुंड जलाशय के आसपास विचरण करता देखा गया. पिछले कई वर्षों से दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी के हाथी ईचागढ़, चांडिल, नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों में स्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं. इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है.स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 193 वर्ग किलोमीटर में फैली दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी हाथियों का प्राकृतिक आवास है, लेकिन भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण हाथी अपने पारंपरिक क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं. ग्रामीणों का सवाल है कि वन्यजीव संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हाथियों को उनके आवास में आवश्यक संसाधन क्यों नहीं मिल पा रहे हैं.
पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण, दूसरी ओर पेड़ों की कटाई
विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यटन विकास के नाम पर जंगलों में कॉटेज और अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि जंगलों के लगातार सिकुड़ने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है.ईको सेंसिटिव जोन में विकास बनाम संरक्षण की बहस
दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है. इसके बावजूद क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि वन्यजीवों के आवास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.बंगाल के अयोध्या पहाड़ क्षेत्र का भी असर जानकारों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित अयोध्या पहाड़ क्षेत्र में बढ़ते निर्माण कार्यों और पर्यटन गतिविधियों के कारण भी हाथियों के पारंपरिक मार्ग और आवास प्रभावित हुए हैं. इसका असर झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं.बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्षहाथियों के गांवों और कृषि क्षेत्रों में पहुंचने से फसल क्षति, संपत्ति नुकसान और जनहानि की घटनाएं बढ़ी हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जंगलों में पर्याप्त जल स्रोत, चारा और सुरक्षित आवास विकसित किए जाएं तो हाथियों का पलायन कम हो सकता है.
स्थायी समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथियों के पारंपरिक आवासों का संरक्षण, जल स्रोतों का विकास, वन क्षेत्र का विस्तार और हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित रखना जरूरी है. पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना समय की आवश्यकता बन गई है.

Friday, June 5, 2026

विश्व पर्यावरण दिवस पर सीआरपीएफ का हरित संकल्प, 134वीं बटालियन ने लगाए 500 पौधे/संपादक विशेष कुमार तांती (बाबू तांती)

 सरायकेला: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सीआरपीएफ की 134वीं बटालियन द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प के साथ व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। बटालियन के जरायेकेला स्थित डेट मुख्यालय एवं दुगनी स्थित बटालियन मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों, जवानों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर लगभग 500 पौधे लगाए।जरायेकेला डेट मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व कमांडेंट त्रिलोक नाथ सिंह ने किया, जबकि दुगनी मुख्यालय में द्वितीय कमान अधिकारी दीपेन्द्र कुमार के नेतृत्व में पौधारोपण अभियान संचालित हुआ। इस दौरान कैंप परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में नीम, आम, जामुन, गुलमोहर, अमरूद, कचनार, शीशम और अशोक सहित विभिन्न फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमांडेंट त्रिलोक नाथ सिंह ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि बढ़ते पर्यावरणीय संकटों के बीच वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस विश्व का सबसे बड़ा वार्षिक पर्यावरणीय जन-जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति प्रेरित करना और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।कमांडेंट ने अधिकारियों, जवानों एवं स्थानीय नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सहायक कमांडेंट पुरुषोत्तम वर्मा, अन्य अधीनस्थ अधिकारी, जवान एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से सीआरपीएफ 134वीं बटालियन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए समाज को हरित और स्वच्छ भविष्य के निर्माण का संदेश दिया।

Thursday, June 4, 2026

सरायकेला खरसांवा जिला में भट्ठियां टूटीं, संचालक फिर फरार! आबकारी विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल/संपादक विशेष कुमार तांती (बाबू तांती)

संपादक  विशेष कुमार तांती (बाबू तांती)/सरायकेला: सरायकेला जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाने का दावा करने वाले आबकारी विभाग की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामले में सरायकेला उत्पाद विभाग ने कुचाई थाना क्षेत्र के जिलिंगदा गांव में छापेमारी कर चार अवैध चुलाई भट्टियों को ध्वस्त करने, लगभग 1300 किलोग्राम जावा महुआ नष्ट करने तथा 30 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद करने की जानकारी दी है। विभाग ने कार्रवाई से जुड़े फोटो और वीडियो भी मीडिया को जारी किए हैं।हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी अवैध कारोबार के कथित संचालक विभाग की पकड़ से बाहर रहे। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि संचालक फरार हैं तथा उनके विरुद्ध झारखंड उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है। लेकिन किन व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है अथवा किसे मुख्य आरोपी बनाया गया है, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग नियमित रूप से अवैध शराब भट्टियों को ध्वस्त करने और भारी मात्रा में जावा महुआ नष्ट करने की जानकारी देता है, लेकिन कार्रवाई के दौरान वास्तविक संचालकों की गिरफ्तारी नहीं होने से अभियान की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि विभाग अवैध कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना चाहता है तो केवल भट्टियां तोड़ने के बजाय इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क और संचालकों तक पहुंचना आवश्यक है। लगातार संचालकों के फरार रहने और उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने से विभाग की कार्रवाई को लेकर संदेह की स्थिति बन रही है।विभाग की ओर से यह जरूर कहा गया है कि अवैध शराब कारोबार में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। वहीं आम जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर अवैध कारोबार के मुख्य संचालकों की गिरफ्तारी कब होगी और उनके नामों का खुलासा कब किया जाएगा।फिलहाल जिले में अवैध शराब के खिलाफ जारी अभियान के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि भट्टियां तो लगातार ध्वस्त हो रही हैं, लेकिन उनके संचालक आखिर कब तक कानून की पकड़ से बाहर रहेंगे?