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Saturday, April 26, 2025
पहलगाम हमले के बाद पूरा देश शोक संतप्त है। सभी मृतकों आतंकी हमले में हुए शहीदों की याद में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा सरायकेला खरसवॉ जिला कमिटी की ओर से दिनांक-27/04/2025(रविवार) को शाम 05:00 बजे एस टाइप आदित्यपुर में कैंडल मार्च निकालना तय किया गया हैं।*
. डॉ शुभेंदु महतो जिला अध्यक्ष सरायकेला खरसावां JMM
आप सभी को सूचित करते हुए कहना है कि विगत दिनांक 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमला हुआ जिसमें 26 लोग मारे गए। पहलगाम में हुआ कायराना आतंकी हमला हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे के खिलाफ एक घिनौनी साजिश है।
आप सभी को सूचित करते हुए कहना है कि विगत दिनांक 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमला हुआ जिसमें 26 लोग मारे गए। पहलगाम में हुआ कायराना आतंकी हमला हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे के खिलाफ एक घिनौनी साजिश है।
*पहलगाम हमले के बाद पूरा देश शोक संतप्त है। सभी मृतकों के न्याय के लिए और आतंकी हमले में हुए शहीदों की याद में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा सरायकेला खरसवॉ जिला कमिटी की ओर से दिनांक-27/04/2025(रविवार) को शाम 05:00 बजे एस टाइप आदित्यपुर में कैंडल मार्च निकालना तय किया गया हैं।*
*अत: झामुमो सरायकेला खरसवॉ जिला अंतर्गत केंद्रीय समिति के सभी पदाधिकारियों/सदस्य,जिला समिति के सभी पदाधिकारियों/सदस्य, नगर समिति के सभी पदाधिकारियों/सदस्य,प्रखण्ड कमिटी के सभी पदाधिकारियों/सदस्य,पंचायत कमिटी के सभी पदाधिकारियों/सदस्य एवं झामुमो के सभी सक्रिय कार्यकर्ता पूरे दल बल के साथ अपनी उपस्थिति रखते हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाये।*
*धन्यवाद।*
*डॉ शुभेन्दु महतो*
*झामुमो जिला अध्यक्ष,सरायकेला-खरसवाँ*
Friday, April 25, 2025
भोगनाडीह में जुटेंगे हज़ारों आदिवासी घुसपैठ और धर्म परिवर्तन के खिलाफ चंपई सोरेन की हुंकार
: पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने राज्य में बढ़ते धर्मांतरण और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक आंदोलन की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि हूल दिवस (30 जून) को भोगनाडीह की पवित्र भूमि से यह आंदोलन शुरू होगा, जहां हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि, धर्मगुरु, मांझी-परगना, पाहन, मानकी-मुंडा और पड़हा राजा जुटेंगे.उन्होंने प्रेस वार्ता में बताया कि यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा की एक ऐतिहासिक शुरुआत होगी.
चम्पाई सोरेन ने कहा कि यदि धर्मांतरण पर समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो हमारे सरना स्थल, देशाऊली और जाहेरस्थान वीरान हो जाएंगे. उन्होंने दो टूक कहा कि जो व्यक्ति आदिवासी जीवनशैली और परंपराओं को त्याग चुका है, या दूसरे धर्म में विवाह कर चुका है, उसे आदिवासी आरक्षण का लाभ लेने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है.
उन्होंने 1967 के उस ऐतिहासिक क्षण को याद किया जब बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में डीलिस्टिंग विधेयक प्रस्तुत किया था. उस विधेयक में धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों से आरक्षण समाप्त करने की मांग की गई थी. यह विधेयक संसदीय समिति के पास गया, जिसने इसे आदिवासी अस्तित्व की रक्षा के लिए आवश्यक बताया. हालांकि, चम्पाई ने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मिशनरी दबाव में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया. उन्होंने बताया कि उस समय 322 लोकसभा और 26 राज्यसभा सांसदों ने इस विधेयक का समर्थन किया था.
चम्पाई सोरेन ने तीखे शब्दों में राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकुड़, साहेबगंज, दुमका जैसे जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठिये आदिवासी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं. वे हमारी बेटियों से छल या धमकी से विवाह कर रहे हैं. इसके बाद उनके माध्यम से आरक्षण व्यवस्था में अतिक्रमण किया जा रहा है. उन्होंने पूछा कि जब सीएनटी-एसपीटी एक्ट जैसी कानूनी सुरक्षा मौजूद है, तो इन घुसपैठियों को सैकड़ों एकड़ जमीन कौन दिला रहा है? जमाई टोला बसाने में कौन मदद कर रहा है
चम्पाई सोरेन ने खेरवाड़ वीरों, तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, बिरसा मुंडा, टाना भगत, पोटो हो और तेलंगा खड़िया जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण करते हुए कहा कि जब इन महान आत्माओं ने कभी समझौता नहीं किया, तो आज का आदिवासी समाज क्यों झुके?
उन्होंने दावा किया कि राज्यभर में चल रहे उनके जनजागरण अभियान को अपार समर्थन मिल रहा है. हूल दिवस के बाद यह आंदोलन और व्यापक होगा. लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरेंगे और केंद्र सरकार को आदिवासी समाज की पीड़ा से










