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Monday, April 27, 2026

भाजपा के जिला मंत्री सतीश शर्मा ने जागृति मैदान में नगर निगम द्वारा प्रस्तावित प्रशासनिक भवन निर्माण का कड़ा विरोध किया है । उन्होंने ने कहा कि कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के बीच, जहाँ सांस लेने के लिए खुली जगह कम होती जा रही है, वहाँ आदित्यपुर-2 का ऐतिहासिक जागृति मैदान आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। नगर निगम द्वारा इस खेल के मैदान पर प्रशासनिक भवन बनाने का प्रस्ताव न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ी के अधिकारों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

पत्रकार दया शंकर सिंह/सरायकेला खरसांवा जिला के लोकप्रिय भाजपा के जिला मंत्री सतीश शर्मा ने जागृति मैदान में नगर निगम द्वारा प्रस्तावित प्रशासनिक भवन निर्माण का कड़ा विरोध किया है । उन्होंने ने कहा कि कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के बीच, जहाँ सांस लेने के लिए खुली जगह कम होती जा रही है, वहाँ आदित्यपुर-2 का ऐतिहासिक जागृति मैदान आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। नगर निगम द्वारा इस खेल के मैदान पर प्रशासनिक भवन बनाने का प्रस्ताव न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ी के अधिकारों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है
जागृति मैदान कोई साधारण खाली जमीन नहीं है। संयुक्त बिहार के दौर से अस्तित्व में रहा यह मैदान क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। रोजाना यहाँ सैकड़ों बच्चे और युवा क्रिकेट, फुटबॉल और कबड्डी जैसे खेलों के माध्यम से अपनी शारीरिक क्षमता और अनुशासन को निखारते हैं
प्रशासन के तर्क और वैकल्पिक समाधान
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के पास भवन निर्माण के लिए हथियाडीह में पहले से ही जमीन चिन्हित है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक जीवंत और सक्रिय खेल मैदान को नष्ट करने की जिद क्यों की जा रही है
जब विकास के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध है, तो बच्चों के भविष्य की बलि देना कहाँ तक तर्कसंगत है?

आज जब दुनिया 'डिजिटल डिटॉक्स' और बच्चों को मोबाइल की लत से छुड़ाने की बात कर रही है, तब जागृति मैदान जैसे स्थल उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए 'फेफड़ों' का काम करते हैं। खेल का मैदान छीनना सीधे तौर पर उनके स्वस्थ जीवन जीने के अधिकार का हनन है।
क्षेत्र के नागरिकों का विरोध केवल एक निर्माण कार्य के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो जनहित और पर्यावरण को दरकिनार कर प्रशासनिक सुविधाओं को प्राथमिकता देती है। एक ऐतिहासिक मैदान को समाप्त करना क्षेत्र की पहचान को मिटाने जैसा है
भाजपा के जिला मंत्री सतीश शर्मा ने स्पष्ट मांग की है कि
*1. जागृति मैदान के स्वरूप के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए।*
*2. नगर निगम अपने भवन का निर्माण पूर्व-निर्धारित हथियाडीह की जमीन पर ही करे।*
*3. सार्वजनिक स्थलों और खेल के मैदानों को 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित कर संरक्षित किया जाए।*
*4. मैदान में नशा करने वालों पर स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाय।*
*5. नगर निगम द्वारा प्रत्येक दिन मैदान की साफ सफाई की जाय।*
विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जागृति मैदान सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि आदित्यपुर के बच्चों के सपनों की उड़ान है। यदि आज हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे हमारे मौन का हिसाब मांगेंगी। मैदान बचाना ही बच्चों का भविष्य बचाना है।

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